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Sunday, 31 July 2016

शेर की जंग और Leadership के 9 सबक

Hiii Friends!!

Stories हमें बहुत कुछ सिखाती है। हर कहानी का अपना lesson होता है। 

आज मैं आपके लिए एक कहानी Cum लेख लेकर आया हूं। यह Story क्या सिखाती है? यह आपकों पूरी कहानी पढने के बाद जरूर पता चल जाएगा। 

तो चलिए शुरू करते है-

हिमाचल के पहाड़ों में एक घना जंगल था। उस जंगल का राजा एक शेर था। शेर अपनी पत्नी शेरनी और दो शावकों के साथ जंगल में रहकर राज करता था। शेर के राज में पूरे जंगल में मंगल था। जंगल के सभी प्राणी खुशी खुशी और निर्भय होकर विचरण करते थे। अपने बलशाली राजा शेर के संरक्षण में उन्हें कोई भय नहीं था, जंगल  में प्रवेश करने वाले किसी भी दूसरे शक्तिशाली और खूंखार जानवर को शेर पटखनी देकर मार डालता था। 
राजा शेर का पूरा मंत्रिमंडल था जिसमें भालू, जिराफ, तेंदुआ, हाथी, बाघ से लेकर खरगोश तक के जानवर शामिल थे। 
एक बार जंगल में कुछ शिकारियों ने प्रवेश किया। शिकारियों को यह खबर थी कि जंगल में शेर और उसका परिवार है जिनकों मारकर उनकी खाल से खूब माल कमाया जा सकता है।

जंगल में शिकारियों के प्रवेश की सूचना गुप्तचर सियार ने राजा शेर को दी। 

शिकारी दल के प्रवेश की खबर सुनकर महामंत्री भालू ने राजा शेर को परिवार सहित कुछ दिनों के लिए पहाड़ की चोटी पर बनी गुफा में जाने की सलाह दी और कहा कि उन शिकारियों के झुंड से हम सब निपट लेंगे।

अपने महामंत्री के मुख से ऐसी बाते सुनकर शेर ने असहमति में सिर हिलाते हुए कह दिया कि शिकारियों के झुंड से वह खुद निपटेगा। शेर को आगे बढता देखकर पूरे मंत्रिमंडल और जंगल वासियों में अद्भुत हौंसला आ गया।

सेनापति बाघ ने राजा शेर को सलाह दी कि शिकारी जंगल में घुसे उससे पहले ही हम उन पर हमला कर देते है, जिससे वे लोग भाग जाएंगे। शेर को यह सलाह पसंद नहीं आई, वह किसी जल्दबाजी में नहीं था। फिर भी बाघ की सलाह को मानते हुए उसमें जरूरी सुधार के साथ शेर ने कहा कि हम हमला करेंगे लेकिन अभी नहीं, थोड़ी देर बाद पूरे योजनाबद्ध तरीके से।
Ram Lakhara Vipul

शेर ने अपने मंत्रियों के साथ गुप्त मंत्रणा की, शिकारियों से निपटने के तरीकों पर सबकी सलाह को ध्यान से सुना। अंत में शेर ने सबकी सलाह को उत्कृष्ट बताते हुए पूरी योजना को सबके सामने प्रस्तुत किया। शेर की योजना सुनकर पूरा मंत्रिमंडल उनसे सहमत हो गया।

अपनी योजना के अनुसार शेर ने पहली चाल चली, जंगल की सभी मधुमक्खियों को उसने बुलावा भेजा। 

कुछ ही देर में जंगल की सारी मधुमक्खियां इकट्ठी हो गई। शेर ने उनकों शिकारियों के झुंड को घायल करने का आदेश दिया। अपने राजा का आदेश पाकर मधुमक्खियों का दल शिकारियों पर टूट पड़ा। अचानक हुए हमले से शिकारी इधर उधर भागने लगे। मधुमक्खियों के काटने से शिकारी घायल हो गए थे। 

मधुमक्खियों से बचने के लिए शिकारियेां के दिमाग में एक उपाय सूझा। 

वे सब पानी के तालाब की ओर भागे, जिसमें डूबकी लगाकर वे उनसे तुरंत रूप से बच सके। तालाब से कुछ दूरी पर ही शिकारियेां के पांव अचानक ठिठक गए, उन्होंने देखा कि बहुत सारे मगरमच्छ तालाब के किनारे पर इधर उधर घूम रहे थे। 

अपने आंखों के सामने मौत खड़ी देखकर शिकारी उल्टे पांव वापस भागे। लेकिन तब तक मधुमक्खियेां ने उन्हें काफी घायल कर दिया था, आंखो पर काटने से सबकी आंखे सूज गई थी। शिकारियों ने शिकार की इच्छा छोड़कर वापस सही सलामत घर लौटने में भलाई समझी। 

लेकिन तभी बीच में शेर की सेना ने बाघ की अगुवाई में हमला बोल दिया। 

आंखों में दर्द और थकान की वजह से वे ज्यादा भाग नहीं सके और सभी शिकारी खुद ही शेर की सेना का शिकार हो गए। 

अपने राजा शेर की सूझबूझ से पूरा जंगल बच गया था, सभी ने अपने राजा की शान में जयकार की।

यह कहानी इतनी ही नहीं है। इसके भीतर ऐसे कई बिंदु आ गए है जिन्हें शायद हम पढते समय नजरअंदाज कर गए होंगे। यह कहानी नेतृत्व कैसे किया जाता है यह दर्शाती है। इस कहानी से नेतृत्व संबंधी क्या सीखा जा सकता है इसके बिंदुओं पर एक बार गौर करते है-

1. संयम और निस्स्वार्थता -  


सबसे पहली बात यह कि शेर खुद मांसाहारी होते हुए भी उसके राज में सभी जानवर खुशी से रहते थे। इसका मतलब यह तो कभी नहीं होगा कि शेर का पूरा परिवार शाकाहारी होगा। यह सच है कि शेर ने अपने परिवार के भोजन के लिए जानवरों का शिकार किया होगा लेकिन जरूरत के मुताबिक। जिससे पूरे जंगल ने शेर की जरूरत को समझा। इसी प्रकार एक नेता की जरूरते उसके अनुयायी समझते है लेकिन तब तक ही जब तक नेता का आचरण संयमित हो।

2. किसी भी Problem में खुद को आगे रखना - 


किसी भी बाहरी खूंखार जानवर से राजा शेर खुद भिड़ता था। किसी भी समस्या से खुद जाकर पहले रूबरू होना एक सच्चे नेता की निशानी है।

3. Simplicity और आगे बढकर चुनौती लेना- 


जंगल में शिकारियेां के प्रवेश पर अपने महामंत्री की जंगल छोड़कर गुफा में जाने की सलाह को राजा ने विनम्रता पूर्वक नहीं माना, बल्कि खुद उनसे लड़ने का निश्चय किया। संकट के समय मैदान नहीं छोड़ने का गुण किसी भी नेता की स्वीकार्यता को और बढा देता है। 

4. जल्दबाजी से काम न लेना - 


अपने सेनापति बाघ की तुरंत हमला कर देने की सलाह को शेर ने अस्वीकार कर दिया। किसी भी विपत्ति के आने पर बिना योजना के उससे दो चार होना अधिकांश रूप से असफलता का कारण बनता है

5. सबका विश्वास प्राप्त कर Successful Plan बनाना - 


बाघ की सलाह को न मानने के बाद भी बाघ की सलाह और अन्य जानवरों की सलाह को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर उसमें फेरबदल के साथ अपनी योजना बनायी।
सुनो सबकी करो मन की!! एक नेता को चाहिए कि वह सबकी सलाह को सुने, उस सलाह का मान करे और आवश्यकतानुसार उसमें Correction कर अपनी योजना बनाए साथ ही उस योजना को प्रस्तुत करते समय यह दर्शाने की पुरजोर कोशिश करे कि सबकी सलाह से ही ऐसी उत्कृष्ट योजना बन पाई है। इससे अपने अनुयायियों की नजरों में Leader का कद बढता ही है।

(Read- कैसे प्राप्त करे लक्ष्य? How to achieve goal in hindi )

6. अपने हितैषियों (Well Wishers) की चिंता करना - 


शेर ने तुरंत अपनी सेना को न भेजकर मधुमक्खियों को पहले भेजा। क्योंकि एक नेता के तौर पर शेर अपने किसी प्रिय को नहीं खोना चाहते थे। (Read - दूसरों का ख्याल रखों - वह आपका हो जाएगा) शेर को भलीभांति पता था कि शिकारियों के पास बंदूके थी, यदि पहला हमला जानवर करेंगे तो हो सकता है कि शिकारियों की गोली से कई जानवर मर जाए।
इसलिए शेर ने उत्कृष्ट उपाय सोचते हुए मधुमक्खियों को पहले हमला करने के लिए कहा, शेर को पता था कि मधुमक्खियों से निपटने के लिए शिकारियों के पास कोई हथियार नहीं होगा।

7. दूरदर्शिता- 


तालाब के किनारों पर मगरमच्छों का घूमना भी शेर की योजना का हिस्सा था। शेर ने दूरदर्शिता दिखाते हुए सोचा था कि शिकारी तालाब की ओर जरूर भागेंगे, इसलिए उसने पहले ही मगरमच्छों को तालाब के किनारों पर खड़ा कर दिया था।

8. उचित समय पर उचित कार्यवाही (Right Time - Right Action)-


 इधर उधर भागकर जब शिकारी पूरे थक गए, तब शेर ने अपनी सेना को हमला करने का आदेश दिया और शिकारियों को मौत की नींद सुला दिया। शेर को यह ज्ञात था कि इस स्थिति में शिकारी बंदूक नहीं चला पाएंगे।


9. इस कहानी में यह भी है कि शेर अगर चाहता तो मगरमच्छों को तालाब में छिपकर शिकारियों को मारने का आदेश भी दे सकता था, लेकिन अपनी सेना के मनोबल को बढाने के लिए शेर ने शिकारियों को डराने के लिए मगरमच्छों को तालाब के किनारे पर खड़ा किया और अपने शत्रुओं का खत्मा खुद किया

यह कहानी हमको एक Leader के तौर पर लड़ना सिखाती है। इस कहानी को आप खुद पढे, समझे। अपने बच्चों, विद्यार्थियों, छोटे भाई बहनों को यह कहानी सुनाए और उन्हें Leadership की विशेषताओं का ज्ञान कराएं।

तो दोस्तों कैसी लगी ये Story!!! है ना वास्तव में Inspirational और Helpful! Inspirational Articles, Poems and Quotes के साथ साथ ऐसी ही Inspirational Stories मैं आपके लिए लाता रहूंगा। बस अपने Valuable Comments के माध्यम से मुझे जरूर बताईएगा कि यह पोस्ट आपकों कैसी लगी? मुझे इंतजार रहेगा........

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6 comments:

  1. Aap dwara likhi gai yah kahani bahut achchi aur motivational hai. aapke dusre lekh bhi pade Ram ji aap bahut nek kaam kar rahe hai. Thanks! Main aapki rugular reader hu.

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    Replies
    1. Shukriya Rashmi ji. Aap logo ke comment padhkar hi blogging ki himmat bani rahti hai.

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  2. बहुत अच्छी प्रेरक जानकारी ,,,
    आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें!

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    Replies
    1. Shukriya Kavita ji. Motivational Article par aapke comment ke liye bhi Thanks!

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  3. राजनीति और सेवानीति का अद्भुत सम्मिश्रण है। बहुत सुन्दर श्री मान।

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